आकाशगंगा क्या है व इसका निर्माण कैसे होता है पूरी जानकारी

आज हम आपको आकाशगंगा क्या है इसके बारे में बताने वाले है आप सभी ने आकशगंगा के बारे में तो कई बार किताबो में या किसी व्यक्ति से सुना ही होगा पर बहुत से लोगो को इसके बारे में विशेष जानकारी नहीं होती पर आपको इसके बारे में जानकारी होनी बहुत ही जरुरी है आकाशगंगा से जुडी जानकारी आपके भविष्य में बहुत ही उपयोगी होती है

akashganga kya hai

ऐसी कई चीजे होते है जिसके बारे में लोगो को पता नहीं होगा व हम अक्सर ऐसी बेहतरीन जानकारी के बारे में आपको बताते रहते है ताकि आपको सभी उपयोगी जानकारी प्राप्त हो सके व अगर आपको आकाशगंगा क्या है इसके बारे में पता नहीं है तो यह आर्टिकल पढ़कर आपको आकाशगंगा और इसके बनने के तरीके के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो जायेगी

आकाशगंगा क्या है

आकाशगंगा ब्रम्हांड में एक विशालकाय रूप होता है व यह सौर मंडल में धूल के कणों और कई तरह की अलग अलग गैसों से मिलकर बना होता है व यह हमेशा गुरुत्वाकर्षण बल से जुड़ा होता होता है व हमारी आकाशगंगा के बिलकुल बिच में एक बहुत बड़ा ब्लैक होल भी है जिसे सुपरमेसिब ब्लैक के नाम से भी जाता है जिसका द्रव्यमान 40 लाख सूर्य के बारबर होता है

अगर आप रात में आकाश की तरफ सीखते है तो आपको कई सारे तारे दिखाई देते है उनमे से कई तारे आकाशगंगा में मौजूद तारे भी होते है जो की हमे रात के वक्त आकाश में दिखाई देते है व कई बार तो यह अँधेरे जैसे काले हो जाते है ऐसी स्थिति में इन्हे देखना काफी मुश्किल होता है व आकाशगंगा में कई तरह की करोडो की संख्या में आकाशगगाये मौजूद है जिन्हे हम गईं भी नहीं सकते

आकाशगंगा कितने प्रकार की होती है

आकाशगंगा कई प्रकार की होती है व इसके बारे में हम आपको विस्तार से बता रहे है ताकि आपको आकाशगंगा के  बारे में पता चल सके

  • एलिप्टिकल आकाशगंगा
  • घुमावदार आकाशगंगा
  • अनियमित आकाशगंगा
  • बौना आकाशगंगा

निम्न  प्रकार की अलग अलग आकाशगंगा होती है व इसके बारे में हम आपको विस्तृत जानकारी बता रहे है ताकि आपको इसके सभी रूप के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त हो सके

एलिप्टिकल आकाशगंगा

एलिप्टिकल आकाशगंगा दीर्घ वृताकार व ज्यादातर गोल आकार की होती है जो की एक छोर से दूसरे छोर तक फैलते रहते है इसमें ट्रिलियन के आसपार पुराने तारे भी पाए जाते है जिसके साथ गैस और धूल के कणों से मिलकर बने कई तत्व भी पाए जाते है यह गांगेय केंद्र की परिक्रमा करते रहते है

घुमावदार आकाशगंगा

यह मिल्की वे आकाश गंगा की श्रेणी में आती है व यह आकार में एक चपटे डिस्क की तरह होता है जिसका केंद्र उभरा हुआ होता है व आसपास की सभी चीजे घुमावदार स्थिति में होती है व इसमें तारे, ग्रह, गैस और धूल आदि सभी पाए जाते है यह सब  केंद्र के चारो तरफ परिक्रमा करते रहते है व इनकी परिक्रमा करने की रप्तार 100 किलोमीटर प्रतिघंटा तक होती है

अनियमित आकाशगंगा

इस आकाशगंगा का आकार न तो घुमावदार होता है न ही गोल होता है व यह अनियमित श्रेणी में आते है जिसके कारण इसे अनियमित आकाशगंगा कहा जाता है यह अन्य  आकाशगंगा के गुरुत्वाकर्षण के कारण प्रभावित होते रहते है इस कारण से इनका आकार कभी भी स्थित नहीं होता है

बौना आकाशगंगा

यह छोटे आकार की आकाशगंगा होती है व इसके आकार की बात करें तो इसका आकार मिल्की वे के 100वें हिस्से के बराबर होता है व इसमें सिर्फ तारे ही पाए जाते है यह भी अनियमित आकाशगंगा की तरह जी दूसरी आकाशगंगा के गुरुत्वाकर्षण के कारण अपना आकार बदलते रहते है व कई बौना या ड्वार्फ आकाशगंगाये मिलकर मजबूत आकाशगंगा की नियमित परिक्रमा करते है

आकाशगंगा की गति और निर्माण

कई तरह की रिसर्च में यह साबित हुआ है की आकाशगंगा की रप्तार बहुत ही तेज होती है इस कारण से यह अक्सर एक दूसरे से टकरा जाते है व इससे नयी नयी आकाशगंगा का निर्माण होता रहता है व इसके कारण में भी बदलाव होते रहते है

आकाशगंगा में नियमित रूप से उद्भव होते रहते है व इसमें या तो आकाशगंगा एक दूसरे से टकरा जाती है या फिर एक दूसरे में विलय हो जाती है व कई आकाशगंगा तो ऐसे भी है जिनका निर्माण अभी तक पूर्ण नहीं हुआ और उनमे तारो के निर्माण होने भी शुरू हो गया इस प्रकार की आकाशगंगा को प्रोटो गैलेक्सी के रूप में जाना जाता है

Calculation – इस आर्टिकल में हमने आपको आकाशगंगा क्या है इसके बारे में जानकारी दी है हमे उम्मीद है की आपको हमारी बताई जानकारी उपयोगी लगी होगी अगर आपको जानकारी अच्छी लगे तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर जरूर करें और इससे जुड़ा किसी भी तरह का सवाल पूछना हो तो आप हमे कमेंट के द्वारा भी बता सकते है

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